Saturday, April 13, 2024
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काशी विश्वनाथ के तर्ज पर हरकी पैड़ी को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का कोई औचित्य नहीं: डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी

हरिद्वार: पूर्व कानून मंत्री डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर हरकी पैड़ी को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का कोई औचित्य नहीं है। अच्छी सड़कें बनें इतना ही बहुत है। उन्होंने विधानसभा के 228 कर्मियों को बर्खास्त करने के फैसले को गलत करार देते हुए आर्टिकल 14 का उल्लंघन बताया और सीएम से कर्मियों को बहाल करने की मांग की।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को ले जाने की बात भी कही। रविवार को हरिद्वार स्थित अटल बिहारी राज्य अतिथि गृह में पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहा, कॉरिडोर बनाने की जानकारी संज्ञान में आई है। कॉरिडोर बनाने का कोई औचित्य ही नहीं है। केवल अच्छी सड़कें ही काफी हैं, क्योंकि वाराणसी में भी कॉरिडोर बनने से लोग दुखी हैं।

कहा, इसके लिए कई मंदिरों को तोड़ना पड़ा, इसलिए यहां ऐसा कुछ न हो, इसका विरोध करता हूं। जिन अधिकारियों ने भी योजना के बारे में सोचा है मुख्यमंत्री उन्हें समझाएं कि ये करना पवित्र भूमि को ठेस पहुंचाने के बराबर होगा। कहा, उत्तराखंड विधानसभा में कर्मियों को नियुक्त कर 2001 से 2015 तक नियमित कर दिया गया, लेकिन इसके बाद 2016 से भर्ती हुए सभी की छुट्टी करने की शुरुआत कर दी।
कर्मियों को बर्खास्त करना भारतीय संविधान का उल्लंघन
कहा, 2001 से 2015 तक सबको नियमित कर दिया, लेकिन बिना कारण 2016 के बाद के कर्मियों को बर्खास्त करना भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन है। कहा, अभी ये मामला सुप्रीम कोर्ट में नहीं पहुंचा है। इसे सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की रणनीति बनाएंगे, लेकिन आशा करता हूं कि सीएम खुद ही जैसे 2001 से 2015 तक के कर्मियों को नियमित किया, इन्हें भी बहाल कर नियमित करने का फैसला लें।

कहा, वरना कोर्ट में ये (सरकार) हारेगी, विश्वास के साथ कहता हूं। कहा, आज तक जो भी केस मैंने लड़े सभी में जीत मिली है। अब 288 कर्मचारियों को उज्जवल करने के लिए कदम उठाएंगे, तब तक ऐसा नहीं होगा, जब तक इस मामले को बिल्कुल भी छोड़ेंगे नहीं।

मुख्यमंत्री को लिख चुके हैं पत्र
सुब्रमण्यम स्वामी बर्खास्त कर्मियों को लेकर कुछ दिन पहले सीएम धामी को पत्र लिख चुके हैं। कहा, एक ही संस्थान में एक ही प्रक्रिया से नियुक्ति पाने वाले कार्मिकों की वैधता में दो अलग-अलग निर्णय कैसे हो सकते हैं। कुछ लोगों की नियुक्ति को अवैध बताने के बाद भी बचाया गया, जबकि कुछ को अवैध करार कर बर्खास्त भी कर दिया गया। यह कार्यवाही कहीं से भी उचित नहीं लगती है।

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