UPI Payment Charges 2026: व्यापारियों के लिए नए MDR नियम समझिए

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नई दिल्ली। UPI के नए MDR नियम को लेकर बहस तेज हो गई है। भारतपे के पूर्व MD और को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर ने ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर लगने वाले MDR को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रोवर ने सवाल किया कि अगर एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को ₹1 लाख UPI भेजता है तो उस पर कोई शुल्क नहीं है, लेकिन किसी व्यापारी को किए जाने वाले बड़े भुगतान पर शुल्क लगाया जा रहा है, तो इसके पीछे आर्थिक तर्क क्या है? उन्होंने बैंकिंग सिस्टम, RBI के सरप्लस और NPCI से जुड़े आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए यह भी सवाल उठाया कि जब डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े संस्थानों में पर्याप्त आय है, तो व्यापारी से MDR वसूलने की जरूरत क्यों पड़ी। 

दरअसल, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI transactions पर 0.4% MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजेक्शन है। वहीं Person-to-Person (P2P) UPI भुगतान राशि चाहे जितनी हो, मुफ्त रहेगा। सरकार के मुताबिक लगभग 96% merchant UPI transactions भी इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। सरकार का कहना है कि MDR टैक्स नहीं, बल्कि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों और पेमेंट ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है, जिसका उद्देश्य UPI के संचालन और विस्तार की लागत को टिकाऊ बनाना है।

लेकिन अशनीर ग्रोवर का सवाल यही है, जब UPI को लंबे समय तक बिना MDR के बढ़ावा दिया गया और इसी वजह से करोड़ों लोग डिजिटल भुगतान की ओर आए, तो अब व्यापारी से शुल्क लेने की जरूरत क्यों पड़ी? अब असली असर 15 अक्टूबर के बाद बाजार में दिखाई देगा क्या व्यापारी इसे आसानी से वहन करेंगे या बड़े भुगतान के लिए ग्राहक फिर कैश की ओर लौटेंगे?