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पीएम मोदी ने बिहार के मखाने और कर्नाटक की अरहर दाल का किया जिक्र

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नई दिल्ली / देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 139वें संस्करण में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल स्थित चंबा क्षेत्र की सूखी हेंवल नदी के पुनर्जीवन की प्रेरणादायी गाथा साझा की। प्रधानमंत्री ने नदी को नया जीवन देने के लिए स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन की ओर से किए गए सामूहिक प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सहभागिता और जल संरक्षण का यह अनूठा मॉडल देश भर के लिए पर्यावरण संवर्धन की दिशा में एक सशक्त और अनुकरणीय उदाहरण है। पहाड़ों में लगातार घटते जलस्रोतों और गर्मियों में गहराते पेयजल संकट के बीच हेंवल नदी की कहानी यह साबित करती है कि जनभागीदारी से किसी भी चुनौती को मात दी जा सकती है। टिहरी जिले के चंबा क्षेत्र में जीवनदायिनी मानी जाने वाली इस नदी के पुनर्जीवित होने से आज चंबा शहर सहित आसपास के लगभग 80 गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया है कि प्रकृति के प्रति सम्मान, स्वच्छता और अपने आसपास के जलस्रोतों की देखभाल हमारी अपनी जिम्मेदारी है। टिहरी गढ़वाल के चंबा में लोगों ने यही भाव जीकर दिखाया है।” उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले हेंवल नदी का जलस्तर तेजी से गिर रहा था और आसपास के पारंपरिक धारे-मंगरे भी सूखने की कगार पर पहुंच गए थे। ऐसे संकट के समय स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर अभियान चलाया। बारिश के पानी को सहेजने के लिए चाल-खाल और खंतियां खोदी गईं, भूजल पुनर्भरण (ग्राउंडवाटर रिचार्ज) के कार्य किए गए और व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया गया। इन समन्वित प्रयासों का परिणाम रहा कि हेंवल नदी पुनः अविरल बहने लगी और दर्जनों प्राकृतिक जलस्रोत भी फिर से जीवित हो उठे।

कार्यक्रम की यात्रा को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 12 वर्ष पूर्व विजयादशमी के पावन अवसर पर ‘मन की बात’ की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा, “हमारे देश में सदियों से तीर्थयात्रा की परंपरा रही है। मेरे लिए ‘मन की बात’ किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है, जहां मुझे देशवासियों के साहस, संकल्प और सेवा-भाव के दर्शन होते हैं।” आगामी दीपावली और छठ पर्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने नागरिकों से अपने आसपास स्वच्छता अभियान चलाने का आह्वान किया। त्योहारी सीजन का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ के प्रति देशवासियों के बढ़ते रुझान की सराहना की। उन्होंने कहा कि त्योहारों में लोग अब स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बिहार का मखाना, कर्नाटक की अरहर दाल और खादी आज दुनिया भर के बाजारों में धूम मचा रहे हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों के ‘शबरी नेचुरल्स’ ब्रांड का उल्लेख करते हुए बताया कि शहद, महुआ, चीड़ और बांस से बने उत्पादों की पैकेजिंग पर आदिवासी कला की सुंदर छाप है, जिसे जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिज़ाइन अवार्ड’ प्राप्त हुआ है। पर्यावरण अनुकूल कृषि की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने पंजाब के 'खेती विरासत मिशन' की पहल 'नव-त्रिन्जन' का उदाहरण दिया। मालवा क्षेत्र में बिना किसी रासायनिक उर्वरक के ऑर्गेनिक और प्राकृतिक रंगों वाली कपास की खेती की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक रंगों से युक्त कपास के कारण कपड़ों को रंगने के लिए अलग से हानिकारक केमिकल्स का उपयोग नहीं करना पड़ता, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।