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उत्तराखंड की वादियों में बसने का सपना अधूरा छोड़ गए नाना पाटेकर, सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि

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देहरादून। भारतीय सिनेमा जगत के प्रख्यात एवं दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की दुखद खबर से देशभर के साथ-साथ उत्तराखंड में भी शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। अपनी अनोखी अभिनय शैली, बुलंद आवाज़ और जीवंत किरदारों से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर का देवभूमि उत्तराखंड से गहरा और अटूट नाता रहा है। उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

 दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म और कला जगत के साथ उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। उत्तराखंड से भी नाना पाटेकर की कई आत्मीय और यादगार यादें जुड़ी रही हैं। उनके निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नाना पाटेकर ने अपने सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवादों के माध्यम से भारतीय सिनेमा में विशिष्ट पहचान बनाई। विभिन्न भूमिकाओं में उनके जीवंत अभिनय ने हिंदी सिनेमा को समृद्ध किया। उनका निधन फिल्म और कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। नाना पाटेकर का उत्तराखंड से जुड़ाव करीब चार साल पुराना है। वर्ष 2022 में वह मराठी फिल्म ‘ओले आले’ की शूटिंग के सिलसिले में चमोली जिले के जोशीमठ और चीन सीमा से सटी नीती घाटी पहुंचे थे। फिल्म की यूनिट ने नीती गांव, तपोवन, लाता और आसपास के क्षेत्रों में करीब नौ दिनों तक शूटिंग की थी। इस दौरान नाना पाटेकर ने न सिर्फ फिल्म की शूटिंग की, बल्कि स्थानीय जीवन, संस्कृति और पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता को भी करीब से जाना। शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर लाता क्षेत्र के एक होमस्टे में करीब सात दिन तक ठहरे थे। होमस्टे संचालक नरेंद्र सिंह राणा के अनुसार, नाना का अंदाज बेहद सहज था। उनका मिजाज कुछ सख्त जरूर नजर आता था, लेकिन बातचीत में उनका आत्मीय और मजाकिया स्वभाव सामने आता था। बताया गया कि उन्होंने होमस्टे में अपने लिए अलग किचन तक तैयार करवाया था, जहां वह चिकन, मटन और सांभर बनाते थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाना पाटेकर पहाड़ के रहन-सहन, वेशभूषा, मौसम और पर्यटन स्थलों को लेकर काफी उत्सुक रहते थे। उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान क्षेत्र की खूबसूरती की जमकर तारीफ की थी। इसी दौरान उन्होंने उत्तराखंड में जमीन खरीदकर पहाड़ों में अपना घर बनाने और यहीं बसने की इच्छा भी जताई थी। उनकी यह इच्छा अब उनके साथ ही अधूरी रह गई। चमोली प्रवास के दौरान नाना पाटेकर ने सेना की ब्रिगेड में अधिकारियों और जवानों से भी मुलाकात की थी। बताया जाता है कि उन्होंने मराठी और तेलुगु भाषी जवानों से उनकी भाषा में बातचीत कर माहौल को खुशनुमा बना दिया था। जवानों के साथ उन्होंने हंसी-मजाक किया और काफी समय बिताया। स्थानीय लोगों के साथ भी उनका व्यवहार आत्मीय रहा। जोशीमठ की तत्कालीन एसडीएम कुमकुम जोशी ने भी नाना पाटेकर से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्हें स्थानीय सेब और अखरोट भेंट किए गए थे। अभिनेता ने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण की सराहना की थी। चमोली में शूटिंग के बाद नाना पाटेकर फिल्म की टीम के साथ रुद्रप्रयाग पहुंचे थे। वर्ष 2022 में वह अभिनेता सिद्धार्थ और अभिनेत्री सयाली संजीव समेत फिल्म टीम के साथ हेलीकॉप्टर से केदारनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा केदारनाथ के दर्शन किए और गर्भगृह में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने भैरवनाथ मंदिर में भी दर्शन किए। केदारनाथ में नाना पाटेकर से मिलने के लिए प्रशंसकों की भीड़ जुटी थी। उन्होंने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया, तस्वीरें खिंचवाईं और प्रशंसकों को ऑटोग्राफ भी दिए। तीर्थ पुरोहित हिमांशु तिवारी ने उन्हें केदारनाथ मंदिर का स्मृति-चिह्न भेंट किया था। 29 सितंबर 2022 को नाना पाटेकर ने ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन का भी दौरा किया था। इसके अलावा देहरादून प्रवास के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की थी। बातचीत के दौरान उन्होंने उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग के लिए बेहद उपयुक्त बताया था और प्रदेश की प्राकृतिक खूबसूरती तथा लोगों के व्यवहार की सराहना की थी। अब नाना पाटेकर के निधन के बाद उत्तराखंड से जुड़ी उनकी ये यादें एक बार फिर सामने आ गई हैं। नीती घाटी की बर्फीली वादियों से लेकर लाता के होमस्टे, सेना के जवानों के साथ ठहाकों, ऋषिकेश की आध्यात्मिक यात्रा और बाबा केदार के दरबार तक उत्तराखंड में बिताया उनका समय उनके प्रशंसकों और स्थानीय लोगों की स्मृतियों में हमेशा जीवित रहेगा।