लंबित सड़क परियोजनाएं जांच के दायरे में, निर्माण एजेंसियों को सीएम हेमंत सोरेन की कड़ी चेतावनी

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रांची। झारखंड में सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज और पुल-पुलिया निर्माण परियोजनाओं में लगातार हो रही देरी पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय में पथ निर्माण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में अब किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को चेतावनी देते हुए निर्देश दिया कि सभी लंबित परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए दो महीने की समय-सीमा तय करते हुए कहा कि निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने पिछले पांच वर्षों के दौरान तैयार की गई योजनाओं, निर्माणाधीन परियोजनाओं और पूर्ण हो चुके कार्यों की विस्तृत जानकारी मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की। समीक्षा के दौरान सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज और पुल-पुलिया निर्माण से जुड़ी कई परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट रखी गई। मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर नाराजगी जताई और अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विभाग को राज्य की सभी सड़क एवं पुल परियोजनाओं का अद्यतन डिजिटल डेटाबेस तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना की लागत, वर्तमान प्रगति, समय-सीमा और निर्माण की स्थिति का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए। इसके साथ ही सभी परियोजनाओं की जियो-टैगिंग सुनिश्चित करने को कहा, ताकि विकास कार्यों की ऑनलाइन निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं होगी। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से लगातार खराब सड़कों, गड्ढों, जलजमाव और निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसी शिकायतों का तत्काल संज्ञान लेकर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सभी जिलों में सड़क परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बरसात के मौसम का उल्लेख करते हुए कहा कि खराब सड़कें और जलभराव दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनते हैं। इसलिए सभी संबंधित विभाग गड्ढों की तत्काल मरम्मत, प्रभावी जल निकासी व्यवस्था और सड़कों की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जहां आवश्यकता हो, वहां संकरी सड़कों का चौड़ीकरण किया जाए ताकि यातायात सुगम और सुरक्षित बनाया जा सके। हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में कई सड़क, फ्लाईओवर और पुल-पुलिया परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने राजधानी रांची सहित सभी जिलों की लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि कुछ प्रमुख परियोजनाओं को अगले दो महीने के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। समीक्षा बैठक में सोलर साइकिल ट्रैक सहित कई नई विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विकास कार्य केवल समय पर पूरे होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी सर्वोच्च स्तर की होनी चाहिए। उन्होंने पुल-पुलियों के किनारों को मजबूत बनाने, जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने और सभी निर्माण कार्यों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के सख्त तेवर के बाद माना जा रहा है कि झारखंड में लंबित सड़क परियोजनाओं की रफ्तार अब तेज होगी। सरकार का लक्ष्य केवल समय पर परियोजनाएं पूरी करना नहीं, बल्कि जनता को सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक सड़क अवसंरचना उपलब्ध कराना भी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि दो महीने की तय समय-सीमा के भीतर विभाग और निर्माण एजेंसियां कितना काम पूरा कर पाती हैं और सरकार अपने सख्त निर्देशों को किस तरह लागू करती है।