सेवा, संस्कृति और तकनीक का अनूठा संगम: राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह के कार्यकाल के 5 वर्ष पूरे, लोक भवन में हुआ भव्य समारोह

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देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने अपने सफल और प्रेरणादायक कार्यकाल के 5 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस विशेष अवसर पर लोक भवन (राजभवन) देहरादून में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जो केवल उपलब्धियों के लेखा-जोखा तक सीमित न रहकर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, तकनीकी नवाचार और लोक भवन परिवार के प्रति आभार का प्रतीक बन गया।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) के कार्यकाल के पांच वर्ष पूरे होने पर लोक भवन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। 15 सितंबर 2021 को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी संभालने वाले गुरमीत सिंह ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल को देवभूमि के साथ जुड़ी भावनात्मक और महत्वपूर्ण यात्रा बताया। इस अवसर पर उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोक भवन के अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया। साथ ही लोक भवन के मुख्य प्रवेश द्वार-3 का लोकार्पण, चार पुस्तकों का विमोचन और गढ़वाली भाषा के लिए एआई आधारित डिजिटल संवाद मंच ‘गढ़ संवाद’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि सेना में चार दशक की सेवा के दौरान उन्हें किसी एक स्थान पर तीन वर्ष से अधिक रहने का अवसर नहीं मिला, लेकिन उत्तराखंड में पांच वर्ष कैसे बीत गए, इसका पता ही नहीं चला। उन्होंने इस अवसर को अपने कार्यकाल की उपलब्धियों से अधिक उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का क्षण बताया, जिन्होंने लोक भवन को एक परिवार और टीम के रूप में आगे बढ़ाने में योगदान दिया। राज्यपाल ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में रिवर्स पलायन, महिला सशक्तीकरण एवं बालिका शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं तकनीक, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि तथा वेलनेस को पांच प्रमुख मिशन के रूप में चिन्हित किया था। लोक भवन के अनुसार इन प्राथमिकताओं को उच्च शिक्षा, शोध, तकनीक, स्वास्थ्य, युवा, महिला सशक्तीकरण और जनभागीदारी से जोड़ते हुए विभिन्न पहल की गईं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ‘वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च’, कॉलेज एफिलिएशन पोर्टल, ‘यूनिवर्सिटी कनेक्ट उत्तराखंड’ और निजी विश्वविद्यालयों के लिए ‘यूनिसंगम’ जैसे प्रयास किए गए। राज्यपाल ने कुलाधिपति के रूप में शोध और नवाचार को धरातल से जोड़ने पर जोर दिया। पांच वर्ष के कार्यकाल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी प्रमुखता मिली। लोक भवन में एआई आधारित स्मार्ट ऑटोमेशन, ई-पास, ऑनलाइन मैनेजमेंट सिस्टम, डिजिटल डैशबोर्ड और ई-ऑफिस जैसी व्यवस्थाएं शुरू की गईं। ‘गार्गी नारी शक्ति’ एआई चैटबॉट के जरिए महिलाओं को कानूनी सहायता, करियर, वित्तीय साक्षरता, सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की पहल की गई। ‘एआई फॉर ऑल’ के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक एआई शिक्षा और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण से जोड़ने का प्रयास भी किया गया। इसी क्रम में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ‘गढ़ संवाद’ को गढ़वाली भाषा के लिए एआई आधारित डिजिटल भाषा संवाद मंच के रूप में लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य गढ़वाली को डिजिटल दुनिया से जोड़ने के साथ स्थानीय भाषा, संस्कृति और लोक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। राज्यपाल ने पांच वर्षों में प्रदेश के सभी जिलों का दौरा किया। लोक भवन की जानकारी के अनुसार उन्होंने 51 वाइब्रेंट विलेज में से 30 गांवों का दौरा कर स्थानीय लोगों, युवाओं और पूर्व सैनिकों से संवाद किया। महिला सशक्तीकरण और बालिका शिक्षा के लिए लोक भवन में बालिका आत्मरक्षा एवं कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना भी की गई। पर्यावरण संरक्षण के तहत लोक भवन में वर्षाजल संरक्षण, नक्षत्र वाटिका और बोनसाई गार्डन जैसे प्रयास किए गए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार रेन वाटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था से लगभग 200 किलोलीटर पानी के संरक्षण की व्यवस्था की गई है। समारोह में ‘आत्मा के स्वर-05’ सहित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों ‘21वीं सदीः चुनौतियां और अवसर’, ‘विकसित भारत 2047 आत्मनिर्भर, समावेशी और सतत राष्ट्र निर्माण के बढ़ते कदम’ तथा ‘विकसित उत्तराखंडः राज्यपाल के पंच स्वप्न और संदृष्टि’ का विमोचन किया गया।राज्यपाल ने लोक भवन के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करते हुए कहा कि किसी भी संस्था की सफलता उसके प्रत्येक सदस्य के योगदान से होती है। कार्यक्रम में उनके पांच वर्ष के कार्यकाल पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। बालिकाओं की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने समारोह में उत्तराखंड की लोक-सांस्कृतिक छटा भी बिखेरी। समारोह का एक और आकर्षण उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला पर आधारित लोक भवन के मुख्य प्रवेश द्वार-3 का लोकार्पण रहा। इस अवसर पर राज्यपाल ने निर्माण से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और श्रमिकों के प्रयासों की सराहना की। पांच वर्ष पूरे होने का यह समारोह एक ओर राज्यपाल की संस्थागत पहलों का संक्षिप्त पड़ाव रहा, वहीं दूसरी ओर लोक भवन को तकनीक, शिक्षा, संस्कृति और जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में किए गए प्रयासों को सामने लाने का अवसर भी बना।