Tuesday, April 23, 2024
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नैनीताल– पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला के तीसरे दिन उत्तराखंड में भूगर्भीय हलचलों पर किया गया मंथन

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के तत्वाधान में आयोजित चार दिवसीय अंतराराष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान अमेरिका से
युवा हिंदी संस्थान न्यू जर्सी अमेरिका के अशोक ओझा और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय की प्रोफेसर गैब्रीयेला निक इलियेवा के नेतृत्व में
आये 15 सदस्यीय दल
को कुमाऊं विवि के भूगर्भ और रसायन विज्ञान विभाग के शोध विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
विद्यार्थियों ने उन्हें गंगोत्री ग्लेशियर के सिकुड़ने, प्लास्टिक के कूड़े से ग्राफीन बनाने की तकनीक, उत्तराखंड की भूगर्भीय हलचलों, नैनीताल की संरचना सम्बन्धी जानकारियां दीं। पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत, यशपाल रावत, योगेश साह, जय जोशी ने भी नैनी झील, नगर की पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव आदि विषयों पर दल को उपयोगी जानकारियां दीं।कार्यक्रमों का आयोजन और संचालन पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. गिरीश रंजन तिवारी ने किया।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष शोध छात्र अभिषेक मेहरा के नेतृत्व में
गजेंद्र खारी,भास्कर बोरा, मयंक पाठक,हरीश बिष्ट,कामिनी बिष्ट नाजिया हसन, दिवाकर बावरी, सोनल रायपा ने बताया कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने गंगोत्री ग्लेशियर के सिकुड़ने की दर का आंकलन कर दावा किया था कि 2035 में यह विलुप्त हो जायेगा और गंगा नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा। लेकिन कुमाऊं विवि की शोध में यह तथ्य उजागर हुआ कि इसके सिकुड़ने की दर इस अध्ययन के अनुरूप नहीं बल्कि बहुत कम है और इसके निकट भविष्य में विलुप्ति की कोई संभावना नहीं है इसके बाद अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अपना दावा वापस लेना पड़ा। विद्यार्थियों ने बताया कि
बलियानाले में
भूस्खलन का मुख्य कारण इस क्षेत्र का चूने की चट्टान से बने होने के साथ ही इसमें भारी मात्रा में भूमिगत जल का होना है। चूना पानी में घुलने के कारण मिट्टी ढीली हो जाती है और खिसकने लगती है। इसे रोकने के लिए आवश्यक है कि भूमिगत जल को पंप करके बाहर निकाला जाय तब कोई अन्य उपचार किये जाएं। अभिषेक मेहरा ने वरुणावत पर्वत के उपचार की तकनीक कुछ बदलाव के साथ बलियानाले में उपयोगी हो सकती है। कार्यक्रमों में
अमेरिका के कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय, पेंसिलवेनिया विवि, कंसास विवि, वेंडरबिल्ट विवि, सैसली विवि मैडिसन , जर्सी सिटी बोर्ड, फोरसाइथ डिस्ट्रिक्ट काउंटी स्कूल, शैंडलर डिस्ट्रिक्ट स्कूल और हिंदी भाषा अकादमी आदि अत्यंत प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे।

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