दूरस्थ पहाड़ी देखरेख केंद्रों पर बायोमेट्रिक ट्रैकिंग उपकरण लागू कर पोषक तत्वों की हेराफेरी पर रोक लगाएगा उत्तराखंड

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उत्तराखंड में बच्चों के संरक्षण और पोषण योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए धामी सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। प्रदेश में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित सभी सरकारी (राजकीय) और गैर-सरकारी (स्वैच्छिक) बाल देखरेख संस्थाओं का अब 'थर्ड पार्टी ऑडिट' (बाहरी एजेंसी से निष्पक्ष जांच) कराया जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई 'राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति' की उच्च स्तरीय बैठक में यह कड़ा फैसला लिया गया है, जिससे अनाथ और जरूरतमंद बच्चों की देखरेख करने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा।

उत्तराखंड सरकार ने बच्चों की सुरक्षा, पोषण और देखरेख से जुड़ी व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित सभी सरकारी और गैर सरकारी बाल देखरेख संस्थाओं का अब थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 26 मई को आयोजित राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति की महत्वपूर्ण बैठक में मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण, मिशन वात्सल्य और मिशन शक्ति योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में योजनाओं के संचालन में सामने आ रही खामियों और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा टेक होम राशन वितरण में पारदर्शिता का रहा। वर्तमान में प्रदेश में फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के जरिए राशन वितरण पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है, जिसके कारण पहले भी गड़बड़ी और धांधली की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि टेक होम राशन का शत-प्रतिशत वितरण फेस रिकग्निशन सिस्टम के माध्यम से ही सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं जल्द पूरी करने को कहा गया है। 

बैठक के दौरान यह भी सामने आया कि राज्य के कई आंगनबाड़ी केंद्र आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कई केंद्रों में बिजली और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन केंद्रों में बिजली और पेयजल की सुविधा नहीं है, उनकी सूची तत्काल तैयार कर संबंधित विभागों को उपलब्ध कराई जाए। जरूरत पड़ने पर इन व्यवस्थाओं के लिए अतिरिक्त बजट भी उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार ने पुराने और अनुपयोगी पंचायत भवनों के इस्तेमाल को लेकर भी अहम फैसला लिया है। जिन पंचायत भवनों का अब उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें मरम्मत कर आंगनबाड़ी केंद्रों के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं असुरक्षित और जर्जर भवनों को ध्वस्त कर नए भवन निर्माण कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने जिला स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समितियों की नियमित बैठकें सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा सकती है। सरकार के इस फैसले को बच्चों की सुरक्षा और संस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। थर्ड पार्टी ऑडिट से बाल देखरेख संस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर प्रभावी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।