Saturday, April 13, 2024
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गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद! मुखबा में होंगे अब मां गंगा के दर्शन

विश्व प्रसिद्ध चारधाम में शुमार गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं। अन्नकूट के पावन पर्व पर गंगोत्री धाम के पुरोहितों द्वारा विधि विधान के साथ शीतकाल के लिए 11 बजकर 45 मिनट पर कपाट बंद कर दिए गए। इस पल के कई श्रद्धालु साक्षी बने जिन्होंने मां गंगा से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। जिसके बाद मां गंगा की भोगमूर्ति डोली से मुखबा गांव के लिए रवाना हुई जहां शीतकाल के दौरान मां की रोजाना पूजा की जाएगी।

विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट बंद करने के मौके पर वेद मंत्रों के साथ मां गंगा की मूर्ति का महाभिषेक किया गया। इसके बाद विधिवत हवन पूजा-अर्चना के साथ दोपहर 11 बजकर 45 मिनट पर कपाट बंद किए गए, जिसके बाद गंगा की डोली लेकर तीर्थ पुरोहित मुखबा के लिए रवाना हुए। वहीं इस पल के कई लोग साक्षी बने। गौर हो कि 15 नवंबर को मां गंगा की उत्सव डोली 6 महीने बाद अपने मायके मुखबा (मुखीमठ) पहुंचेगी। जहां पर ग्रामीण मां गंगा का स्वागत एक बेटी की तरह करेंगे। वहीं यमुनोत्री धाम के कपाट 15 नवंबर को बंद होंगे। वहीं यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां यमुना के दर्शन खरसाली में होंगे. वहीं इसी दिन 15 नवंबर को सुबह बाबा केदार के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार शीतकाल में दर्शन उखीमठ में होंगे। वहीं 18 नवंबर को भगवान बदरी विशाल के कपाट बंद होंगे। इसके साथ इस साल के लिए चारधाम यात्रा का समापन हो जाएगा। वहीं केदारनाथ धाम यात्रा में हेली सेवाओं का संचालन भी 14 नवंबर यानि आज तक ही होगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार अपने पितरों के उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने यहां एक पवित्र शिलाखंड पर बैठकर भगवान भोलेनाथ की तपस्या की थी। जिसके बाद भगवान भोलेनाथ ने राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी गंगा को अपनी जटाओं से भूलोक में भेजा था। मान्यता है कि मां गंगा ने इसी स्थान पर धरती का स्पर्श किया था और आगे चलकर राजा भगीरथ के पितरों का उद्धार किया था। जिसके बाद यहां मां गंगा का मंदिर बनाया गया जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति एक बार भी मां गंगा में स्नान कर लेता है, वो इस जन्म के ही नहीं पूर्वजन्म के पापों से भी मुक्त हो जाता है।

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