3 साल के लिए स्वीकृत हुए सात नए पद, विदेशी रिक्रूटमेंट में आएगी पारदर्शिता

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देहरादून। उत्तराखंड के बेरोजगार और हुनरमंद युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी और खुशखबरी वाली खबर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में राज्य के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। कैबिनेट ने सहसपुर स्किल हब में स्थापित 'विदेश रोजगार प्रकोष्ठ' के सफल संचालन के लिए एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के गठन को हरी झंडी दे दी है। इसके साथ ही इस विशेष यूनिट के लिए 7 नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। सरकार के इस बड़े फैसले से अब उत्तराखंड के युवाओं को विदेशों में नौकरी पाने के लिए निजी एजेंटों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही किसी धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ेगा। सरकार खुद रिक्रूटमेंट एजेंट की भूमिका में आकर युवाओं को विदेशी नियोक्ताओं से जोड़ेगी।

दरअसल, प्रदेश के युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए 'विदेश रोजगार प्रकोष्ठ' की स्थापना पहले ही की जा चुकी थी। वर्तमान में यह प्रकोष्ठ भारत सरकार के एनएसडीसी-इंटरनेशनल के साथ मिलकर काम कर रहा है। लेकिन, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों के बड़े नियोक्ताओं और दूतावासों से सीधे संपर्क साधने और एग्रीमेंट करने में विभागीय अधिकारियों को विशेषज्ञता और सीमित संसाधनों के कारण कई व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसी तकनीकी और व्यावहारिक अड़चन को दूर करने के लिए कैबिनेट ने अब विशेषज्ञों से लैस पीएमयू (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट) के गठन पर अपनी अंतिम सहमति दे दी है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद यह विशेष यूनिट पहले चरण में अगले 3 वर्षों के लिए काम करेगी। इसके बाद इसके प्रदर्शन की समीक्षा कर पदों के पुनर्नियुक्ति पर विचार होगा। यह पीएमयू मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों को अंजाम देगी। विदेशों में उपलब्ध नौकरियों के अवसरों से उत्तराखंड के युवाओं को सीधे जोड़ना। राज्य के उन इच्छुक युवाओं का एक मजबूत डेटाबेस तैयार करना जो विदेश में करियर बनाना चाहते हैं। विदेशी नियोक्ताओं की मांग के अनुरूप युवाओं को 'एडवांस ट्रेड स्पेसिफिक ट्रेनिंग' और विदेशी भाषाओं की विशेष ट्रेनिंग देना। युवाओं को विदेशी नौकरी के नियमों, वीजा प्रक्रियाओं और सुरक्षित रोजगार के प्रति जागरूक करना। सरकार की योजना इस व्यवस्था को यहीं तक सीमित रखने की नहीं है। भविष्य में इस विदेश रोजगार प्रकोष्ठ को अत्यधिक हाई-टेक और प्रभावी बनाने के लिए एक नई सरकारी कंपनी की स्थापना की जाएगी। यह कंपनी आधिकारिक तौर पर एक 'रिक्रूटमेंट एजेंट' के रूप में काम करेगी। यानी युवाओं की काउंसिलिंग से लेकर, उनकी ट्रेनिंग, इंटरव्यू और विदेश में प्लेसमेंट तक की पूरी जिम्मेदारी पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी स्तर पर निभाई जाएगी। सहसपुर स्किल हब के अधीन काम करने वाली यह नई व्यवस्था उत्तराखंड के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों के उन युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगी,जो प्रतिभावान हैं लेकिन सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण विदेशों में अपनी किस्मत नहीं आजमा पाते थे। कैबिनेट के इस फैसले के तहत स्वीकृत किए गए 7 नए पदों पर जल्द ही अंतरराष्ट्रीय बाजार और विदेशी प्लेसमेंट के विशेषज्ञों को नियुक्त किया जाएगा। इस फैसले के बाद प्रदेश के तकनीकी, मेडिकल, हॉस्पिटैलिटी और अन्य क्षेत्रों से जुड़े युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ राज्य में बेरोजगारी दर में कमी आएगी, बल्कि उत्तराखंड के युवा वैश्विक पटल पर देवभूमि का नाम रोशन कर सकेंगे।