Monday, February 26, 2024
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उत्तराखण्ड में नहीं थम रहा श्रमिकों का उत्पीड़न! सितारगंज की फूड कंपनी प्रबंधन ने रातों-रात गेट के बाहर लगाया बंदी का नोटिस, आखिर कहां जाए श्रमिक?

ऊधम सिंह नगर। उत्तराखण्ड के उद्योगों में लगातार श्रमिकों के उत्पीड़न की खबरें सामने आ रही है। ऊधम सिंह नगर की बात करें तो यहां एक ओर जहां रुद्रपुर में इंटरार्क कंपनी के श्रमिक करीब दो महीनें से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं वहीं अब सितारगंज की एक फूड प्रोडक्ट कंपनी जायडस ने रातों-रात कंपनी गेट के बाहर बंदी का नोटिस चस्पा कर दिया। इस नोटिस को पढ़कर श्रमिकों के पैरों तले जमीन खिसक गई और अब वह आंदोलन पर उतारू हैं।

दरअसल सोशल मीडिया पर एक पत्र (बंदी नोटिस) वायरल हुआ है। बताया जा रहा है कि यह नोटिस सितारगंज की जयडस वेलनेस प्रोडक्ट्स लिमिटेड की ओर से जारी किया गया है। इस नोटिस में लिखा गया है कि समस्त श्रमिकों को यह पूर्णरूप से ज्ञात है कि कंपनी जयडस वेलनेस प्रोडक्ट्स लि. कामप्लेन, ग्लूकोन-डी, कूकीज का निर्माण करती है और सभी श्रमिकों को यह भी ज्ञात है कि सितारगंज यूनिट में बनाए जाने वाले उत्पाद को सम्पूर्ण भारत से कच्चा माल मंगाकर बनाया जाता है और उस तैयार उत्पाद का कुछ भाग उत्तराखण्ड व आसपास की मार्किट में बेचा जाता है परंतु अधिकांश उत्पाद को पूर्व एवं दक्षिण भारत के राज्यों में बेचा जाता है। कोविडकाल के चलते सितारगंज यूनिट के उत्पादकों के उत्पादन की कीमत में लगातार बढ़ोत्तरी होने लगी जो प्रबंधन के अथक प्रयासों के बाद भी किसी भी प्रकार से कम नहीं की जा सकी। उत्पादकों के निर्माण कार्य में बढ़ोत्तरी मुख्यतः उत्पाद में प्रयोग होने वाले कच्चे माल की कीमत बढ़ना एवं बाजार में कंपटीशन होने के कारण उत्पन्न हुई है। बाजार में हमारे जैसे हमारे जैसे उत्पाद बनाने वाले कई और भी प्रतिष्ठान है जो कम दामों में अपने उत्पादन बेच रहे हैं ऐसी स्थिति में कंपनी को बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा भी बनाए रखने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में सितारगंज यूनिट में किए जा रहे उत्पादको की उत्पादन लागत अधिक होने एवं उत्पादकों के उत्पादन में लगातार हो रही आर्थिक क्षति के कारण यह विधिक रूप से उचित एवं वैधानिक हो गया है कि यूनिट को बंद कर दिया जाए। नोटिस में यह भी लिखा गया है कि कंपनी के सभी कर्मचारियों को उनके सभी विधि देय जिसमें बंदी मुआवजा भी सम्मिलित है उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं।
अब ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर रातों-रात कंपनी गेट पर नोटिस चस्पा कर देना कहां तक जायज है। जो श्रमिक सालों से कंपनी में कार्यरत हैं उनका क्या होगा? फिलहाल श्रमिक अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं और कंपनी प्रबंधन को कोस रहे हैं।

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